भारतीय वैज्ञानिक को यूनेस्‍को पुरस्‍कार

यह पुरस्‍कार ऐसे वैज्ञानिकों, प्रख्यात हस्तियों और संस्थानों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने नैनो-प्रौद्यागिकी एवं नैनो-विज्ञान के विकास में काम किया है

 
By Navneet Kumar Gupta
Last Updated: Wednesday 28 June 2017

नैनो-विज्ञान एवं नैनो- प्रौद्योगिकी के विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए यूनेस्‍को ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा समेत विश्‍व के सात वैज्ञानिकों एवं संस्‍थानों को वर्ष 2017 के यूनेस्‍को मेडल से नवाजा है। यह पुरस्‍कार सोमवार को पेरिस स्थित यूनेस्‍को मुख्‍यालय में प्रदान किए गए।

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के शोधकार्य में ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन आधारित नैनो-कंपोजिट्स एवं माइक्रो नैनो-इलेक्ट्रोमैकेनिकल, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य, क्रियात्मक इंटरफेस, सॉफ्ट मैटर की माइक्रो एवं नैनो क्रियाविधि, नैनो-पैटर्निंग और नैनो-फैब्रीकेशन जैसे विषय शामिल रहे हैं।

प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के अलावा इस वर्ष यह पुरस्‍कार नीदरलैंड्स के वैज्ञानिक प्रोफेसर थियो रेजिंग, अमेरिकी संस्‍थान कीसाइट टेक्‍नोलॉजी, जापानी कंपनी टोयोडा गोसेई, कंबोडिया के डॉ. हन मेनी, रूस के डॉ. व्लादिमीर बोल्शकोव और मास्को टेक्नोलोजिकल यूनिवर्सिटी को दिया गया है।

पिछले सात वर्षों से यह पुरस्‍कार ऐसे वैज्ञानिकों, प्रख्यात हस्तियों और संस्थानों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने नैनो-प्रौद्यागिकी एवं नैनो-विज्ञान के विकास में महत्‍वपूर्ण कार्य किया है। वर्ष 2010 में शुरू किए इस पुरस्‍कार से अब तक 37 व्यक्तियों एवं संस्थानों को नवाजा जा चुका है। यूनेस्‍को मेडल से सम्‍मानित कई वैज्ञानिकों को तो नोबेल पुरस्‍कार भी मिल चुका है।

यूनेस्को की महानिदेशक आरिना बोस्कोवा ने इस अवसर पर कहा कि ''दवा निर्माण में अभिनव पदार्थों के विकास से लेकर जल प्रदूषण कम करने और संचार तकनीक में नैनो-प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिनका हमारे जीवन पर सीधा असर पड़ता है।” नैनो-विज्ञान ने चिकित्सा सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। इसकी मदद से पेंसिल से बने बिंदु से भी करोड़ों गुना छोटे रोबोट के द्वारा शरीर के अंदर झांका जा सकता है।

नैनो-विज्ञान  भौतिकी, रसायन-विज्ञान तथा जीव-विज्ञान समेत विज्ञान की विभिन्‍न शाखाओं का समन्वित रूप है, जिसके अंतर्गत नैनो कण, नैनो गुच्छ (नैनो क्लस्टर) आदि के भेद खोलने के प्रयास किए जाते हैं। नैनो-विज्ञान में परमाणुओं एवं अणुओं के अत्‍यंत सूक्ष्‍म स्तर पर कार्य किया जाता है।

भारत में भी अनेक संस्थान एवं विश्वविद्यालयों में नैनो-प्रौद्योगिकी एवं नैनो-विज्ञान के क्षेत्र में कार्य हो रहा है। मोहाली में नैनो-विज्ञान, भारतीय विज्ञान संस्थान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के अलावा आईआईटी में भी नैनो-विज्ञान में महत्वपूर्ण शोधकार्य हो रहे हैं। 

(इंडिया साइंस वायर)

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  • Congrats for Indian scientist..... Can research scholar participate in that or nt.

    Posted by: Anamika Singh | 2 years ago | Reply